एक बार की बात है, एक घने जंगल में एक शेर रहता था। एक दिन उसने सोचा कि आज गाँव घूमने चलता हूँ। वह जंगल से निकलकर गाँव की ओर चल पड़ा।
रास्ते में उसे एक अंधे आदमी का घर मिला। जैसे ही शेर उस घर के पास से गुजरा, उसकी पूँछ एक बर्तन से टकरा गई और बर्तन नीचे गिर गया।
आवाज सुनकर अंधे आदमी को लगा कि कोई कुत्ता आया है। उसने तुरंत अपनी लाठी उठाई और शेर को मारना शुरू कर दिया। जब तक शेर को समझ आया कि क्या हो रहा है, तब तक उसके ऊपर चार-पाँच लाठियाँ पड़ चुकी थीं।
शेर किसी तरह वहाँ से भागकर जंगल में वापस आया। उसने सोचा, “आखिर कौन-सा जानवर मुझे मार रहा था?”
कुछ देर बाद उसने फिर गाँव जाने का फैसला किया। रास्ते में उसे बहुत प्यास लगी। उसे एक सुराही दिखाई दी। शेर ने सुराही में अपना सिर डालकर पानी पी लिया।
लेकिन जब उसने सिर बाहर निकालने की कोशिश की, तो उसका सिर सुराही में फँस गया। आवाज सुनकर वही अंधा आदमी फिर बाहर आया। उसने फिर दो-चार लाठियाँ शेर पर चला दीं।
शेर डरकर भागने लगा, लेकिन सुराही उसके सिर में फँसी होने के कारण उसे कुछ दिखाई नहीं दे रहा था। वह कभी एक दीवार से टकराता, तो कभी दूसरी दीवार से।
शोर सुनकर गाँव के लोग भी वहाँ आ गए। उन्होंने देखा कि शेर का सिर सुराही में फँसा हुआ है। लोगों ने डंडे उठाए और शेर को भगाने लगे।
शेर किसी तरह अपनी जान बचाकर जंगल में वापस पहुँच गया।
वहाँ उसे एक हाथी मिला, जो जंगल में डॉक्टर था। हाथी ने पूछा, “क्या हुआ शेर भाई?”
शेर ने हाथी को सारी घटना बता दी।
हाथी ने कहा, “लाइए, मैं आपकी सुराही निकाल देता हूँ।”
हाथी ने अपनी सूँड से शेर को पकड़ा और गोल-गोल घुमाने लगा। कुछ ही समय में शेर की सुराही निकल गई और शेर हवा में उछलकर एक पेड़ पर जा गिरा।
शेर बोला, “भाई, मैं तो पेड़ पर आ गया हूँ। अब मुझे नीचे उतारो।”
हाथी ने अपनी सूँड से पेड़ को पकड़ा और जोर-जोर से हिलाने लगा। शेर नीचे गिर गया, लेकिन उसी समय पेड़ भी उसके ऊपर गिर गया।
शेर की हड्डियाँ टूट गईं। हाथी ने तुरंत पेड़ हटाया और शेर को बाहर निकाला।
शेर ने कहा, “आज के बाद मैं कभी गाँव नहीं जाऊँगा!”
सीख: बिना सोचे-समझे किसी जगह जाना और मुसीबत में फँसना समझदारी नहीं है। हमेशा सावधानी से काम लेना चाहिए।
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